सागर सा गहरा ,नदिया सा बहता, झरनों की झर- झर, पानी की कल- कल ,पर्वत सा ऊंचा ,बारिश की रिमझिम ,तारों की टीम -टीम ,फूलों का रंग जो ,
तितली सी चंच� read more >>
किया जो विश्वास तूने अपनों पर बस धोखा ही तो खाया है ,
फिर क्यों तू इतना इतराया है, इसने घर-घर को जलाया ,
रिश्तो ने दे कर दुहाई हर अपने को लू read more >>