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Bholenath sharma
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My Articles
जो व्यर्थ बिता दिए पल- व्यर्थ समय बिताते रह गये
जो पाया वो जापा जीवन मैं , कूछ मिटाते हम रह गये । कर न सके कुछ इस जीवन मैं , व्यर्थ समय बिताते रह गये । वे क�
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ये नव वर्ष समार्पित हे तुमको
ये नव वर्ष समर्पित है तुमको,। राघव जी तेरे चरणों में । बरसेंगें आनंद , इस नगरी में , श्री राम प्रभु के चरणो में ।
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ये नव वर्ष समार्पित हे तुमको
ये नव वर्ष समर्पित है तुमको,। राघव जी तेरे चरणों में । बरसेंगें आनंद , इस नगरी में , श्री राम प्रभु के चरणो में ।
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मोबाइल-मोबाइल देखते देखते हम सबको भूल जाते
उदासी ही उदासी , छायी है हर पलो में । कोई टहलने को ही नहीं निकलता , व्यस्त हे सब मोबाइलो में । बचपन �
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विराज रहै है अवध बिहारी
सब ग्रह नक्षत्र मिल , योग बनावत है। शुभ , पगु धार रहे ,प्रभु रघुनाथ जी शुभ । है तारारण हार प्रभु , जय श्री राम प्रभु तार दियो प्र�
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गुरू की कृपा-हो जीवन सबका असान
गुरूवरहि दाता गुरूवरहि ज्ञान विज्ञान विधाता | सकल गुण सम्पूर्ण गुरू ज्ञानी तुम हो ज्ञाता । हम मानव को देकर ज्ञान ।
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पुस्तकालय-जरूरी है कुछ चीजे वन को संवारने के लिए
जरूरी है कुछ चीजे, जीवन को संवारने के लिए । पुस्तकालय भी जरूरी है, ग्रामो ग्रामो के लिए । महान विद�
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मेरी याद-तुझे मेरी याद आती होगी
बीत गया वो पल बीत गया वो दिन । क्या अब रह लेते हो तुम मेरे बिन । बिस्तर पर करवट बदलक�
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दानव की मानव-अपनी मर्दानगी पर लज्जा नहीं आती
कि चुपचाप बैठे देखते रहे यहाँ होता रहा शोषण नारियों का । अपनी मर्दानगी पर लज्जा नहीं आती निरस्त्र करते अपमान नारियों का ।
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अकेला मन-न किसी से प्रीत हैन किसी से नफरत
कि वह रहता है वह कैसा अकेला मन इस जगत में । रोज एक ही कार्य मे वह ऊबता होगा इस जगत में । कैसे रहता ह�
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