Pinky Kumari 13 Jan 2025 आलेख अन्य 29725 0 Hindi :: हिंदी
सच कहते वो लोग जो कहते थें। कि हर चिज का आनन्द बच्चपन में आता है। एक बच्चपन ही ऐसा है। जिसमें किसी चिज का ज्ञात नहीं होता है। होता तो बस आनंद का अब बड़े हो चुके है। जिम्मेदारियों से कन्धे झुक से गयें है। अब किसी चिज का आनन्द नहीं रहा पता नहीं क्यों जब हम बात कि गहराईयों तक जाते है। तो पता चलता है कि आखिर सच क्या है। हमसे जुड़ी परम्पराएं, प्रथाएं, त्योहार आदि ने हमें इतना घेर रखा है। कि हम उन सबसे बहार आ ही नहीं पाते मजबुरन ही सही हमें वो प्रथाएं निभानि पड़ती है। भले ही जैब में एक पैसा ना हो पर वो त्यौहार उधारी पर बनाने पड़ते है। इसीलिए देश का एक गरीब एक गरीब बन कर रह गया है। मध्यम वर्गिय परिवार एक माध्यम बन कर रह गया है। इन प्रथाओं को निभाने का हम जीवन के सत्य को कैसे जाने क्योंकि इन प्रथाओं ने हमें जकड़ रखा है। परेशान सब है। , दुःखी सब है। निभाना कोई भी नहीं चाहता पर निभायें जा रहा है। पता नहीं क्यों कभी पूछा है। अपने आप से अगर हम यें प्रथाएं और त्यौहार , परम्पराएं, आदि नहीं निभाएंगे तो क्या हो जाएँगा हमारे दुख का कारण कही ना कहीं ऐसी प्रथाएं जिससे हम चाहकर भी बहार नहीं आपाते जिस दिन अपने आप से प्रश्न करने लगोंगे तब पता चलेंगा कि सत्य क्या है। अपने आप से सवाल करों अगर यह प्रथाएं नहीं होगी तो क्या होगा और है तो क्या हो रहाँ है। अपने आप से देखों कि एक गरीब क्यों गरीब है। मध्यम वर्ग एक मध्यम ही क्यों है। और एक अमीर एक अमीर ही क्यों है। में मानती हूँ कि हर कोई अमीर नहीं बन सकता पर हमारे आस पास फैल रहें अन्धविश्वों से हम दूर कैसे रहें हमें किसी को नहीं बताना कि सत्य क्या है। पर हमें अपने आपको जानना है। कि सत्य क्या है। में मानती हूँ कि इन प्रथाओं से सबको बहार निकालना सम्भव नहीं है। पर हम खुद तो निकल सकते है। ना बहार धर्म यह नहीं कि भगवान के आगे दिप जलाकर घण्टों बैठ जाना , या चारों तीर्थ कर आना धर्म यह कि कोई भूखा ना रहें किसी गरीब का दिल ना दुःखाए अगर हम दे नहीं सकते तो उसे छिनने कि नियत ना रखे धर्म यह कि किसी जीव कि हत्या ना करें किसी जीव को सताएं ना किसी जीव को अपने स्वर्थ के लिए मार कर खाएं ना धर्म सबकों एक समान और एक साथ मिलकर रहने पर विश्वास रखता है। अगर हम कुछ कमा रहें है। तो उसमें से कुछ हिस्सा भलाई के काम में लगाएं वो भी अपने हाथों से दान वहीं जो अपने हाथों से किया जाएं कर्म वही जो स्वयम के द्वारा किया जाएँ और पैसे वही जो अपनी मेहनंत द्वारा कमाया जाएं अगर तुम्हारे पास ताकत है। तो उसे कहीं अच्छे कार्यो में लगाएं जहाँ धर्म को निभाने कि बात आती है। वहाँ आकर हम सिर्फ तमाशा देखते है। पर धर्म के नाम चल रही कुप्रथाओं , आडम्बरों , को और दिखावें को चुनते है। एक ही जीवन है। सत्य को जानों आस - पास के लोगों को समझौ दुनिया को समझो तब पता चलेगा कि सत्य क्या है। पंतग उड़ा कर किसी जीव कि हत्या करना किसी दूसरें का गला कांटना किसी कि जान लेलेना यह कैसा धर्म है। यह तो हमारा स्वार्थ है। जिसकी आड़ में ना जाने कितनों के दिल दुःखाएं है। और कितनों कि हत्या की है। आप सोचते होंगे कि में अक्सर ऐसी उदासीन भरी बातें क्यों करती हूँ बताती हूँ कहीं ना कहीं मैंने सत्य को जाना है पूरा नहीं पर जितना भी जाना है। बस गहराई से जाना है। इसी लिए अब मेरा किसी त्योहारों में प्रथाओंमें आन्द नहीं रहाँ आन्द आता है तो किसी गरीब को खुशिया देकर में अमीर तो नहीं पर भगवान ने इतना दिया है। कि उसमें से मेंने कुछ हिस्सा किसी कि भलाई के काम में लगा दिया तो यह घाटे का सोदा नहीं होंगा हर इंसान अपने आपमें एक अमीर और सुखी इंसान है। बस दिल को बड़ा करके देखों पूरी दुनिया अपनी सी लगेगी अपने आप को उस जगह देख कर रखों तब पता चलेगा कि असली दुःख होता क्या है तभी आप लोगों के बारें में अच्छा करने के बारे में सोंच सकते हों भुलों मत भगवान नही है हम इंसान है। हम जब हिस्साब होंगा तो बरा बर होंगा कृपया सत्य को जाने अगर हम किसी का अच्छा नहीं कर सकते तो हमें किसी का बुरा भी नहीं करना चाहिए। असली धर्म को जाने सत्य क्या है। वो जाने में क्या हूँ और कौन हूँ यह जाने खाना , कमाना, और सो जाना यहीं जीवन नहीं है। अपने आपको इन सबसे उपर उठौ और देखों कि जीवन क्या है। दुःख क्या है। सुःख क्या है। जन्म क्या है। मृत्यु क्या है। धर्म क्या है। कर्म क्या है। ज्ञान क्या है और जीवन क्या है। जानों अपने आपको जब खुद पर काम करोंगे ना तब पता चलेंगा कि सत्य क्या है। जब दूसरों के दुःख को या दूसरों कि पिड़ा को अपनी पिड़ा समझकर मदत करोंगे ना तब पता चलेंगा कि जीवन सिर्फ मेरा नहीं बल्की मुझसे जुड़े हर मनुष्य हर जीव का है। तब तक लड़ों जब तक सांस है। आखरी सांस तक लड़ों आखरी सांस तक जानों की सत्य क्या है। यही कर्म है। हर चिज का आनन्द लों खुश रहो खुशिया बाठों अपने स्वार्थ के लिए किसी जीव कि जान ना लों दया करों , प्रेम करों और प्रेम को समझों और आडम्बरों , और पाखण्डों का विरोध करों मेरा यहाँ विरोध करने का मतलब यह कि आप उस जगह से उस महौल से हमेशा के लिए दूर हो जाएँ यही विरोध है। क्योंकि हम सबकों नहीं समझा सकते कि क्या गलत है। और क्या सही छोंटे तोर पर ही सही यह काम हमें ही करना होंगा अक्सर गलत काम का साथ ना देना ही सबसे बड़ा विरोध होता है। या पिछे हट जाना ही विरोध करने के बराबर होता है। आखिर में यहीं और बार - बार कहूँगी की सत्य को जाने सत्य क्या है। धन्यवाद 🙏🙏✍️✍️
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