virendra kumar dewangan 30 Mar 2023 आलेख दुःखद fruit 112678 0 Hindi :: हिंदी
कच्चे फलों-आम, केला, पपीता, चीकू को पकाने के लिए अवैध रूप से कार्बाइड, खरपतवार नाशक और एथिलीन राइपनर का उपयोग किया जाता है। ये मानव शरीर के लिए खतरनाक होने के कारण प्रतिबंधित हैं। करीब 300 रुपए में मिलनेवाले इन धातक रसायनों के पैकेट में 10 पुड़िया रहती है। इसकी दो पुड़िया या पावडर एक कैरेट केला या अन्य फलों के बीच में दबाकर रखने से दो से तीन दिनों के भीतर सारे कच्चे फल पक जाते हैं। कार्बाइड को पानी में मिलाते हैं, तो उसमें से उष्मा निकलती है और एसिटिलीन गैस का निर्माण करती है। यह उष्णता स्वास्थ्य संबंधी परेशानी उत्पन्न करती है। इन घातक रसायनों के प्रयोग से फलों की बाहरी स्थिति तो लुभावनी हो जाती है, लेकिन इसका मूल स्वाद व महक रफ्फू चक्कर हो जाता है। वहीं इन रसायनों से निकलनेवाली गैसों से कैंसर समेत किडनी, लीवर, फेफड़े और तंत्रिकातंत्र संबंधी विकार शरीर में उत्पन्न होने लगते हैं। पहचानः जब केले को प्राकृतिक तरीके से पकाया जाता है, तब उसका डंठल काला रहता है और केले का रंग गर्द पीला। साथ ही, केले पर थोड़े-थोड़े काले धब्बे दिखते हैं, जिसे ‘चिककबरी केला’ कहते हैं, जो उसकी नैसर्गिकता का बोधक हुआ करता है। इसके उलट यदि केले को कार्बाइड से पकाया जाता है, तो उसका डंठल हरा हो जाता है और केले का रंग नींबुई पीला यानी लेमन येलो हो जाता है। यही नहीं, रसायन से पकाए गए केले का रंग एकदम साफ पीला होता है। उसमें कोई दाग-धब्बा नहीं दिखता। रसायन से पकाया गया यही केला स्वास्थ्य के लिए लाभदायक न होकर हानिकारक होता है। अतः, ग्राहक को जागना होगा, तभी उसका भला हो सकता है। --00-- अनुरोध है कि लेखक के द्वारा वृहद पाकेट नावेल ‘पंचायत’ लिखा जा रहा है, जिसको गूगल क्रोम, प्ले स्टोर के माध्यम से writer.pocketnovel.com पर ‘‘पंचायत, veerendra kumar dewangan से सर्च कर और पाकेट नावेल के चेप्टरों को प्रतिदिन पढ़कर उपन्यास का आनंद उठाया जा सकता है तथा लाईक, कमेंट व शेयर किया जा सकता है। आपकी प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
लेखक-परिचय लेखक शासकीय सेवा से सेवान�...