संदीप कुमार सिंह 17 Jun 2023 आलेख देश-प्रेम नफरत फैलाना बंद करें, मानवता की माला, उदासीनता को भगाएं, खुद भी सुखी रहें, नफरत बांटने से नफरत मिलती, सम्मान देने से सम्मान, भ्रष्ट नीति से निकल कर, इतिहास साक्षी है, मानव धर्म का प्रचार_प्रसार, यह धरा एक अनमोल गुलशन है, और फूल कभी आपस में लड़ते नहीं, बुद्धिजीवी वर्ग, प्यार से प्यार बढ़ाते चलो, मानवता की दीप जलाते चलो, नफरत जला कर खाक कर दो, हाथ से हाथ मिलाकर चलो 29416 0 Hindi :: हिंदी
नफरत फैलाना बंद करें, मानवता की माला एक _दूजे को पहनाएं। मानवता के रंग में रंग कर मानवता की दुनिया से उदासीनता को भगाएं। क्योंकि मानवता से बढ़कर कोई भी धर्म पूरे ब्रह्मांड में नहीं है। खुद भी सुखी रहें और दूसरे को भी सुखी रखें। प्यार बांटने से प्यार मिलता है, नफरत बांटने से नफरत मिलती है। सम्मान देने से ही सम्मान के हकदार कोई भी बन सकता है। इसलिए भ्रष्ट नीति से निकल कर मानव धर्म का प्रचार_प्रसार करें तो आने वाले भविष्य में भी मानवता के लिए वरदान सिद्ध होगा। इतिहास साक्षी है नफरत करने वालों का अंजाम भी बहुत ही बुरा होता है। यह धरा एक अनमोल गुलशन है जिसके हम सारे प्राणी सगंधित फूल हैं। और फूल कभी आपस में लड़ते नहीं हैं बल्कि आपस में एक अद्भुत प्यार को दर्शाते हैं जिसे देख कर और लोग ललचाते हैं। इसलिए बुद्धिजीवियों वर्ग नफरत करना छोड़ दें एवम् अपने आप को पहचाने मैं कौन हूं, मनुज जन्म का उद्देश्य क्या है? तब तो आप बहुत कुछ पा सकते हो अन्यथा नफरत का बाजार लगाने से एक दिन ऐसा आएगा की खुद तो जलोगे ही दूसरों को भी जलाओगे। ज्यादा वाद_ विवाद से कुछ मिलने _वूलने वाला है नहीं इससे अच्छा है मेहनत_लगन से कुछ ऐसा बना कर जाएं जिस से लोगों को सु:ख मिले, और आप बनाने वाले को असीम दुआ ही दुआ मिले। प्यार से प्यार को बढ़ाते चलो। मानवता की दीप जलाते चलो। नफरत जला कर खाक कर दो_ हाथ से हाथ को मिलाकर चलो। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....