Disha Shah 25 May 2023 आलेख समाजिक 39143 0 Hindi :: हिंदी
माता पिता और संतान की सोच संताने जब बढ़ी होती है तब उनके सोच विचार सब कुछ अलग होते है . ऐसे में माता पिता चाहते है की उनकी संताने उनके कहेने पे आगे बढ़े लेकिन संताने कुछ और ही चाहती है उदाहरण माता पिता चाहते है उनकी संताने इंजीनियर बने लेकिन संतान को किसी और क्षेत्र में रुचि होती है ऐसे में माता पिता और संतान की सोच नहीं मिलती है . जिससे मातापिता और संतान के रिश्ते में गलत पहेमि की दिवार भी पनपने लगती है . अगर संताने माता पिता की बात मान लेती है तो वो कही ना कहि दुखी रहेती है और ज़िंदगी भर माता पिता पर दोष देती है और जब संताने अपने सपने , अपने लक्ष्य को चुनती है तब माता पिता को तकलीफ होती है क्यों की उसको उस क्षेत्र के बारे में कुछ भी पता नहीं होता है . इसलिए माता पिता को पहले अपनी संतान को आज़ादी देनी चाहिए की उससे अपने ज़िंदगी में जो करना है वो करे दूसरी बात माता पिता अपनी संतान को समजाते है की जितनी चादर हो उतने ही पैर फ़ैलाने चाहिए ये एक गलत सोच को हटा देना चाहिए क्यों की ये एक गलत सोच है इंसान को आगे बढ़ने से रोकती है इसीलिए इस सोच को हटा देना ही माता पिता के लिए अच्छा है . तीसरी बात माता पिता को कभी भी अपनी संतान और किसी और की संतान में तुलना नहीं करना चाहिए क्यों की हर इंसान अलग है ,हर इंसान की सोच टैलेंट सब कुछ अलग है तब तुलना करना ही क्यों है ? इससे भी संताने और माता पिता के बिच दरारे पैदा हो जाती है . चौथी बात माता पिता को अपनी संतान पे भरोशा होना चाहिए की वो अद्भुत है कुछ भी कर सकते है अपनी जिंदगी मे . और जब माता पिता साथ नहीं होते उनके क्षेत्र में तब भी संतान को आगे बढ़ना चाहिए उस क्षेत्र में अपना 1000% योगदान देना चाहिए लगातार मेहनत करनी चाहिए , धैर्य , आत्मविश्वास और दढ़ता की गति को मजबूत करना चाहिए क्यों की इससे ही संताने आगे बढ़ सकती है और माता पिता का नाम रोशन कर सकती है .