DIGVIJAY NATH DUBEY 24 May 2023 आलेख प्यार-महोब्बत #दिग्दर्शन 35858 0 Hindi :: हिंदी
ऐ बसंती पवन तू क्यू बार बार उसकी खुस्बू की बहार लेकर आती है , क्या तुझे पता नहीं है कि अब मै उस खुसबू को भूलने की कोशिश कर रहा हूं , तू क्यू बार बार अपने पत्ते लहराकर मेरे चेहरे पर गिराती है, तुझे पता है तेरी ये गुस्ताखी मुझे उसकी जुल्फो के फिजाओं में खो जाने को मजबूर करता है । तुझे कितना मै समझाऊं की ये अपने हवा के झोकों को मेरे ऊपर मत आजमा इससे एक अजीब सी सिहरन महसूस होती है जो उसके कोमल बदनो के समान लगता है , मै उस स्नेह के दरिया से निकलने का प्रयत्न कर रहा हूं और तू मुझे उसी की तरफ धकेल रही है कहीं तेरी मुझसे कोई दुश्मनी तो नहीं जो इन झोको से उठने वाले धुलकंडो से मुझे उसके स्नेह में डूबा कर सराबोर करने का इरादा बना रही हो । देख तेरी ये गलती मुझे दिल के अंदर से झगजोर रही है जो इन तेज हवाओं से एक आवाज निकाल रही है और मुझे लगता है कि मुझे फिर से कोई बुला रहा है और मै उसकी ओर खींचने वाला हूं । अब ये बेमौसम बरसात करके तू मुझे उसके प्रेम से गीला कर रही है , क्या तू नहीं जानती कि अगर फिर से इस बेमौसम बारिश मै बीग गया तो कहीं मै प्रेम में बीमार ना हो जाऊं । लगता है कि तू पूरा मन बना के आई है कि मुझे अपने आगोश में लेकर ही रहेगी । पर मैं भी तेरे इस नुस्खे से अब पूरी तरह वाकिफ हो गया हूं , अब मैं वो नही जो तेरे ठंडी मंद मंद मुस्कान रूपी झोकों पे नाज खा जाऊंगा और सब कार बार छोड़कर तेरी तरफ दौड़ता चला आऊंगा । अब तो तेरी हर एक चाल मुझे कोई शातिर चाल जान पड़ती है । अब इनपर चलना कोई खतरे से कम नहीं नजर आता । अब तो मेरे चलने का उद्देश्य बदल चुका है जो कल तक पूर्वी पवन के चलने पर आनंदमय हो जाया करता था अब पश्चिमी पवन की तरफ प्रफुल्लित हो रहा हूं जो मुझे एक दीर्घ और उद्देश्यपूर्ण मार्ग प्रशस्त करा सकता है । अब तो यही मेरा लक्ष्य है और यहीं से मेरे हृदय की आशा पूर्ण होने वाली है। दिग्दर्शन !