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जीवन का सच्चा आनंद साहित्य

संदीप कुमार सिंह 07 Jun 2023 आलेख समाजिक मेरा यह आलेख समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 33012 0 Hindi :: हिंदी

साहित्य और जीवन एक_दूसरे से अलग नहीं है।
जीवन का सच्चा आनंद साहित्य ही प्रदान करती है। बिना साहित्य के एक आदर्श समाज की कल्पना नहीं की जा सकती है। साहित्य है तो समाज में रस है। जहां रस नहीं हो वहां क्रोध का वास होता है। जहां क्रोध का वास हो वहां नाश विराजमान हो जाता है। इसलिए साहित्य समाज का दर्पण भी है। और दर्पण वह जो हमें सजना सिखाता है। दर्पण के सहायता से हम अपने आप को सुन्दर बनाते हैं। दर्पण सभी को उसके खामियां_कमियां दिखाता है। ठीक इसी तरह साहित्य भी समाज को सजाना सिखाती है। समाज की खामियां दूर करने में काफ़ी सहायक होती है। साहित्य के अध्यन से हम अपनी कुंठित मानसिकता से निकल सकते हैं। एवं समाज में खुशहाली कायम कर सकते हैं। साहित्य तमाम विश्व को एक विशेष दिव्य ऊर्जा से प्रकाशित करती है। साहित्य के अध्यन से ही हम एक _दूसरे के हित में सोच सकते हैं_कर सकते हैं। बिना दूसरों को मदद किए अपना कल्याण सम्भव नहीं है। साहित्य समाज का श्रृंगार है। साहित्य है तो समाज में शोभा है। कविता_कहानी_गीत_गजल_भजन_शेरो_शायरी को सुनें बिना क्या हम अपने जीवन को शतप्रतिशत दे सकते हैं नहीं। बिना मनोरंजन के स्वस्थ जीवन जीना मुश्किल है। अतः साहित्य और समाज एक_दूसरे के अभिन्न अंग हैं।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍️
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)
बिहार

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