BALDEV RAJ 30 Mar 2023 आलेख समाजिक दुख का अनुभव केवल वही कर सकता, जिसने दुख सहा हो 60845 0 Hindi :: हिंदी
जिस के शरीर में एक बार कांटा गड़ जाये, वह नहीं चाहता कि किसी भी प्राणी को कांटा गड़ने की पीड़ा सहनी पड़े , क्योंकि उस पीड़ा और उसके द्वारा होने वाले विकारों से वह समझता है कि दूसरे को भी वैसी ही पीड़ा होती है । परन्तु जिसे कभी कांटा गड़ा ही नहीं, वह उसकी पीड़ा का अनुमान नहीं लगा सकता ।