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भष्ट्राचार

Pinky Kumari 30 Mar 2023 आलेख समाजिक 43168 0 Hindi :: हिंदी

भष्ट्राचार का नाम लेते ही सबसे पहले हमारे दिमांक में एक ही नाम आता है। वो है। हमारे देश के नेता जी हाँ भष्ट्राचार का दूसरा नाम ही है। राजनेता कोई भी भष्ट्राचारी हमें किसी ना किसी पार्टी का साथी जरूर होगा क्योंकि हमारे राजनेता के साथ के बिना कोई भष्ट्राचारी नहीं हो सकता इस लिये मेने भष्ट्राचार का दूसरा नाम नेता रखा है। और आज के भष्ट्राचार कि में बात करूतो एक तरफा भष्ट्राचार हो गया है। एक तरफा मतलब कि भाजपा पार्टी भष्ट्राचारी नहीं है। बाकी सारी पार्टी के नेता भष्ट्राचारी है। माफ किजियेगा में किसी पार्टी कि बुराई नहीं कर रही हु में तो बस न्याय कि बात कर रही हू ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती और किसी राजनेता के साथ के बिना भष्ट्राचार नहीं फैलता इस बात को हम भली भाती जानते है। इंसान में जैसे - जैसे लालच बढ़ा  वैसे - वैसे देश का भष्ट्राचार बढ़ा लालच होता तभी तो कुछ गलत होता है। वरना हमारे देश एक आम आदमी भी तो है। वो अभी तक आम ही है। और तरफ गरीब आगे बढ़ा कौन है। जिसके पास सब कुछ होते हूँ भी और पाने कि इच्छा होती है उसे लालच कहते है। भष्ट्राचार ने देश को इतना खोखला कर दिया है। कि ब्लैक मनी तो वाईट मनी होने का नाम ही नहीं लेती हम और आप सब आये दिन यही देखते है कि किस आज इस के घर छापा पड़ा आज इसके घर करोड़ो मिले है। चलो भष्ट्राचार शब्द का अर्थ समझ लेते है भष्ट्राचार का अर्थ है। जो देश के संविधान और कानून व्यवस्था के विरुद्ध या अनुचित व्वहार करता है। उनके विरुद्ध चलता है। उसे भष्ट्राचारी कहते है। शायद यह शब्द आवली सही होगी अगर देश के नेता ही भष्ट्र आचरण करने लगेतो उनके लिये हमारे देश में क्या कानून है। भष्ट्राचार हम छोटे - छोटे रूप देख सकते जैसे किसी वस्तु के तय दाम से ज्यादा पैसे लेना यह भी भष्टाचार है। यह काम सरकार कर रही है। मंहगाई बढ़ा कर अब आप यह बोलोगे की सरकार थोड़ी ना बेचती है। वस्तुये और कहूँगी नहीं पर इसी तरह सरकार के पास छोटे - छोटे रूप में पहुंचती है। दूसरा रिश्वत लेकर नौकरी लेगना,रिश्वत देकर काम करवाना,रिश्वत देकर कानून तोड़ना और रिश्वत कहाँ नहीं चलती हर जगह रिश्वत देकर काम होते है। हम देख सकते है। भष्ट्राचार हर रूप में विद्ययमान है। पर हम हर बार इस पर बात करके रह जाते है। क्या करे कुछ कर भी नहीं सकते आम आदमी अपना घर चलाता है। गरीब आदमी अपनी दो वक्त कि रोटी के लिये भागता है। उनके पास कहाँ वक्त होता है। और बचे उच्चेतब के लोग इनकी जीत हर बार होती आयी क्योंकि इन्ही लोगों को सरकार का सपोर्ट होता है। सरकार जाती इन्हीं लोगों के पास है। चलों हम भष्ट्राचार कि बात करते है। भष्ट्राचार ने गरीबी और अमीर कि खाई को इतना बढ़ा दिया हैं। कि जैसे सबको पता है। गरीब और गरीब होता जा रहा है। अमीर और अमीर होता जा रहाँ हमारे देश में रंग को लेकर भेद भाव नहीं होता चलो कुछ तो अच्छा होता है। पर हमारा देश दो भागों में बटा हुआ है। एक उच्चातबका और एक निच्चाला तबका इन दो भागों में हमारी देश कि जनता बटी हुयी है। और कहाँ जाता है। कि छोटे बच्चे हमेशा बड़ो को देखकर सिखते है। भष्ट्राचार के कारण लोगों में बढ़ता असंतोस चाहे कितना ही कमाले पर जो थोड़ा और पाने कि चाह में  यह चिज हमें गलत कार्य करने से नहीं रोकती और ना जाने हम थोड़े और के चकर में कितने गलत काम कर बैठते है। इसका अंदाज़ा हमें नहीं होता और मेरा लेख कोई भष्ट्राचार तक सिमित नहीं है। लोगों को यह बताना कि हम मानव कितने लालची हो चुके है। हमने किसी वस्तु को नहीं छोड़ा हमने अपने स्वार्थ के लिये जितना निचे गिराना था हम गिरते चले गये हमें यह बात कभी समझमें नहीं आई कि बस करो कितना गिरेगे पर नहीं हमारा लालच ही हमारा विनाश है। इस बात को समझों और सरकार कि बात करेतो में अपने लेख में हमेशा लिखती हूँ कि सरकार तो बस वोट बैंक कि राजनिती करती है। उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि चाहें अपराध हो उन्हें कोई मतलब नहीं होता जो जितने उचे पद पर होता है। वो कभी गरीबी, बेरोजगारी, भष्ट्राचार, अपराधों, मंहगाई, पर कभी बात नहीं करेगें और नाहीं विकास कि बात करेगे यह हमारी लड़ाई है। हमें इससे लड़ना है। हमें सरकार को जागरूक करना होगा हमारी लड़ाई किसी धर्म से लेड़ना नहीं है। किसी को धर्म के नाम पर मारना नहीं हैं। बल्की सरकार को उसकी जिम्मेदारीया याद दिलाना है। पहले अंग्रेजो ने हमें गुलाम बनाया अब हम सरकार के गुल्लाम बन बठे है। हमारे देश का मुदा राम या पैगम्बर नहीं है। हमारा विकार कोई राम या पैगम्बर नहीं करने वाले समझों इस बात को धर्म से उपर उठकर कोई बात क्यू नहीं कि जाती सरकार से देखो सरकार चुनाओं के समय किये गये वादे पूरे हुये या नहीं और फिर पुछो हिसाब रखना सिखों और देखते रहो हमारे आस पास क्या गलत हो रहा है। और क्या सही अगर नहीं देख सकते तो खड़े रहों सड़क पर लाठिया लेकर कोई नहीं सुन्ने वाला चाहें कोई मरे या जिये बड़े मुद्दे सुलझाने से देश कि सच्चाई नहीं बदल जाती है। और सरकार का चमचा बन्ना बन्द करो सच के लिये बोलो वरना धर्म के नाम पर यूही मरते रहेगे सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ने वा ला जमी कलम उठेतो सच के लिये उठे जबभी बोलोतो सच के लिये बोलो भ्रष्टाचार जैसे तमाम ऐसे मुदे हमारे देश के सामने जिसे हमारी सरकार अन्देखा कर रही है। जिसे हम अन्देखा कर रहें है। और इसका अंजाम हमारी गरीब जनता भुगतेगी आम जनता भुगतेगी पैसे वालो का क्या है। आज इस सरकार के साथ कल दूसरी सरकार आयेगे उनके गुन गान करने लगेगी और मिडिया को भी अपना काम ईमानदारी से करना चाहीए मिडिया का काम है। सच को दिखाना सच का साथ देना नाकी सरकार कि नाकामीयो छुपाना तो सच का साथदो जो झुट है। उसे नकारते चलो भष्टाचार जैसे अनेक मुदों पर बात करो सरकार के सामने

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