AJAY KUMAR JOSHI 13 Feb 2025 आलेख धार्मिक आध्यात्मिक, आध्यत्म, आत्मविश्वास, आत्मचिंतन, चेतना, कुंडलिनी, साधना, मंत्र 34789 0 Hindi :: हिंदी
भक्ति की शक्ति: आज से लगभग 8 साल पहले की बात है , में एक नाई के पास जाया करता था सेविंग बनवाने वह मेरे से दुनिया दारी की बाते करता और में उसकी बातों का जवाब देते हुए धर्म कर्म का पाठ पढ़ाने लगता मेरी भाषा मे संस्कृत के कई श्लोक ओर रामायण के दोहे सम्मलित होते ओर उपनिषद के व्याख्यान वो मुझ से बहुत प्रभावित रहता वैसे जो भक्ति में निस्वार्थ लगा रहता है उसकी वाग शैली में चमत्कारिक प्रभाव उत्पन्न हो ही जाता है, उन दिनों मेरा ईश्वर कृपा से ऐसा ही माहौल था । उस नाई ने मुझे एक whatsapp ग्रुप में जोड़ा जिसका नाम था "तथास्तु" उस ग्रुप में कई गणमान्य व्यक्ति जुड़े थे अधिकतर राजकीय लोग थे और कुछ पंडित थे और भी कई थे जो अनेक प्रकार की धार्मिक चर्चायें करते थे, उन चर्चाओ में में अपनी सहभागिता अवश्य देता था क्योंकि में आध्यात्म से प्रबल रूप से जुड़ा हुआ था और प्रभु कृपा से मेरे दिय गए आंसर एकदम सहज और सटीक होते थे उसी ग्रुप में एक महात्मनः जुड़े थे में भी उनके व्याख्यानो से प्रभावित था क्योकि उनकी संस्कृत और आध्यत्मिक ज्ञान में अच्छी पकड़ थी । इस लिए मेने उनके मोबाइल नंबर सेव कर लिए थे बाद में पता चला वो संस्कृत के जानकार ओर राजकीय स्कूल के प्रधानाचार्य है उन्होंने संस्कृत में कई शिव स्तुतियां भी सृजित की हुई थी , ग्रुप अच्छा चल रहा था लेकिन कुछ सामाजिक कंटकों ने ग्रुप में अभद्र भाषा का प्रयोग किया जिससे उस ग्रुप का विखंडन हो गया और ग्रुप एडमिन द्वारा ग्रुप डिलीट कर दिया गया । एक बार में अपने एक काम को लेके बहुत परेशान था क्योंकि उसके लिए घर वालो का दबाव भी था । परेशान हो कर पहली बार सकर्म साधना प्रराम्भ की उसके अंदर मेंने अपने दैनिक पूजा पाठ में सकाम मंत्रो को जोड़ा इस प्रकार मेरा सुबह शाम 2-2 घंटो का पूजा पाठ चला जिस में मंत्र जप ध्यान हवन सम्मलित थे। लगभग ये कर्म करते करते मेरे को एक महीना बीत चुका था आध्यात्मिक ऊर्जा तो बढ़ रही थी लेकिन कोई काम न हुआ ,लेकिन ध्यान की क्रिया से मस्तिष्क शांत हो गया था अब किसी बात की परेशानी नही थी लेकिन जो पूजा कर्म बनाया था वो निरंतर चलता रहा लगभग डेढ़ दो महीने बाद एक दिन फोन की घंटी बजी लेकिन उस वक्त में ध्यान में था जब पूजा कर्म पूरा हुआ तो फोन को देखा उसमे उस महात्मनः के नंबर से फोन आया हुआ था। ग्रुप को विखंडित हुए वब दो साल बीत चुके थे आज दिन तक मेरी उनसे बात भी नही हुई थी मेने तुरंत फोन लगाया और बोला "बोलो गुरु जी कैसे याद किया" उन्होंने बताया कि उनके ध्यान में मैं आ रहा हूँ। मेने बोला जब आप का कॉल आया था तब में खुद ध्यान में बैठा हुआ था। फिर वो कुछ न बोले ओर कहने लगे आप के जो परेशानी है उसका उपाय में बुधवार को बताऊंगा में सक्ते में था कि उनको मेरी परेशानी भी मालूम थी। फिर उन्होंने मुझे उपाय बताया और उस उपाय से मेरा काम हुआ । एक कहावत है हाथ से दिया दान और मुख से लिया भगवान का नाम कभी खाली नही जाता। भगवान की भक्ति आप के लिए कब कोन सा लिंक बिठा कर कोनसा दरवाजा खोलदे ये कोई नही बता सकता Ajay Always : सत्य की खोज में