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भगवान प्राप्ति के भक्ति- भाव..

DINESH KUMAR SARSHIHA 05 Sep 2024 आलेख धार्मिक #भक्तिभाव#bhaktibhav 51623 0 Hindi :: हिंदी

रामकृष्ण परमहंस ने भगवान की प्राप्ति के लिए भक्ति के इन पाँच भावों का वर्णन किया है, जिनसे साधक भगवान के प्रति अपनी प्रीति व्यक्त कर सकते हैं। इन भावों को अपनाकर व्यक्ति अपने आराध्य से जुड़ाव महसूस कर सकता है:

1. **दास भाव**: इसमें भक्त भगवान को अपना स्वामी मानता है और स्वयं को उनका सेवक। जैसे हनुमान जी अपने प्रभु राम के प्रति थे।
  
2. **मित्र भाव**: इसमें भगवान को अपने मित्र के रूप में देखा जाता है, जैसे सुदामा ने श्रीकृष्ण को मित्र माना।

3. **वात्सल्य भाव**: इसमें भगवान को अपने बच्चे के रूप में माना जाता है और उसकी सेवा माता-पिता के रूप में की जाती है। जैसे रामकृष्ण ने रामलला की पूजा की।

4. **माधुर्य भाव**: इसमें भक्त भगवान को प्रेमी के रूप में देखते हैं, जैसे गोपियों ने कृष्ण से प्रेम किया।

5. **संत भाव**: इसमें भगवान को शांत और निष्काम भाव से पूजा जाता है, जैसे रामकृष्ण ने माँ काली के प्रति किया।

इन भावों को अपनाकर साधक अपनी साधना के माध्यम से भगवान के निकट आ सकते हैं।

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