Usman 24 Feb 2025 आलेख अन्य #बचपन #यादें #nostalgia #गांव_की_यादें #बचपन_की_मस्ती #स्कूली_जीवन #बचपन_के_दिन #माँ_की_डाँट #खेल_कूद #गर्मियों_की_छुट्टियां 31495 0 Hindi :: हिंदी
बचपन जिंदगी का वह खूबसूरत दौर होता है, जिसे हर इंसान कभी न कभी याद करता है। यह वह समय होता है जब न कोई चिंता होती है और न ही किसी बात का डर। बस खेलना, कूदना, दोस्तों के साथ मस्ती करना और हर छोटी-छोटी चीज़ में खुशी ढूँढना ही हमारी दुनिया होती है। मुझे आज भी याद है जब बारिश के दिनों में हम गली में कागज़ की नाव चलाया करते थे। पानी में गिरने की फिक्र नहीं होती थी, बस मस्ती करनी होती थी। कभी-कभी माँ की डाँट भी खानी पड़ती थी, लेकिन अगली ही बार फिर वही शरारतें दोहराते थे। गर्मियों की छुट्टियों में दादी-नानी के घर जाने की खुशी ही अलग होती थी। वहाँ गाँव के खेतों में दौड़ना, आम के पेड़ से कच्चे आम तोड़कर खाना, और नदी के किनारे मछलियाँ पकड़ने की कोशिश करना – ये सब यादें आज भी दिल को सुकून देती हैं। स्कूल के दिनों की भी अपनी अलग ही बात थी। सुबह-सुबह स्कूल के लिए तैयार होना, दोस्तों के साथ टिफिन शेयर करना और खेल के पीरियड का बेसब्री से इंतज़ार करना – ये सब अनमोल पल थे। कभी-कभी मास्टर जी से डाँट भी पड़ती थी, लेकिन दोस्तों के साथ हँसी-मज़ाक में सब भूल जाते थे। आज जब जिंदगी की भागदौड़ में उलझ जाते हैं, तो वही बचपन के दिन सबसे ज्यादा याद आते हैं। काश, फिर से वो दिन वापस आ पाते, जब खुशियाँ छोटी-छोटी चीज़ों में बसी होती थीं और दुनिया इतनी आसान लगती थी।