virendra kumar dewangan 22 Oct 2024 आलेख देश-प्रेम Madrasha 53358 0 Hindi :: हिंदी
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को चिट्टी लिखकर मदरसों और मदरसा बोर्डों को सरकारी फंडिंग पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इन्हें सरकारी अनुदान देना बंदकर देना चाहिए। देश के शीर्ष बाल अधिकार संस्था ने मदरसों के कामकाज को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए यह भी कहा है कि मदरसा बोर्ड भी बंद होने चाहिए। आयोग ने हालिया मदरसों पर एक रिपोर्ट-‘‘गार्जियन आफ फेथ आर ओप्रेसस आफ राइटस और कान्स्टीट्यूशनल राइट्स आफ चिल्ड्रन वर्सेस मदरसा’’ जारी किया है, जिसमें कहा गया है-अधिकारों के संरक्षक या अधिकारों के बाधक। आयोग ने अपने महत्वपूर्ण पत्र में कहा है कि राइट टू एजुकेशन यानी आरटीई एक्ट 2009 के दायरे से बाहर रहकर धार्मिक संस्थाओं के काम करने से बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा है कि सरकारी फंड किसी ऐसे संस्थान पर खर्च नहीं कर सकते, जो शिक्षा के अधिकार में बाधक हो। इससे बाल अधिकारों का हनन होता है। बाल अधिकार आयोग ने कहा है कि धार्मिक शिक्षा प्रदान करना संबंधित समुदाय की जिम्मेदारी है। राज्य बिना किसी तुष्टीकरण के संविधान और आरटीई एक्ट के तहत उसे दी जानेवाली जिम्मेदारी को समझे। ऐसा नहीं करना मौलिक अधिकारों का उल्लंधन करना है। आयोग ने अपने पत्र में अनुशंसा की है कि राज्य सरकारें सुनिश्चित करे कि मदरसों में पढ़नेवाले सभी मुस्लिम बच्चों का औपचारिक स्कूलों में दाखिला हो और वे आरटीई एक्ट के पाठ्यक्रम के मुताबिक शिक्षा ग्रहण करें। यदि ऐसा नहीं करते हैं, तो मदरसों की फंडिंग बंद की जाए व मदरसा बोर्ड भी भंग की जाए। लेकिन, अफसोस कि सुप्रीमकोर्ट ने मदरसों में पढ़नेवाले बच्चों को स्कूलों में स्थानांतरित करने की राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की सिफारिश पर अंतरिम रोक लगा दी है। --00-- निवेदन है कि पढ़ने के उपरांत अपवोट, कमेंट व शेयर करना ना भूलें।
लेखक-परिचय लेखक शासकीय सेवा से सेवान�...