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अधुरी कहानी

सुजीत कुमार झा 30 Mar 2023 आलेख दुःखद Google 118524 0 Hindi :: हिंदी

क्यू आज मेरी अधूरी कहानी याद आने लगी है,जिसे मैने दिल से चाहा वही आज फिर सताने लगी है।आज मेरे स्वप्न रूपी मन में क्यू गुण गुनाने लगी है, स्वप्नों सा था मेरी जिन्दगानी फिर मुझे क्यू आज तड़पाने लगी है।ना आँखों की चाहत रही ना घर वार रहा अब मेरा,जाने क्यू फिर बार बार याद आने लगी है।जब चली गई मुझे इस दुनिया मे अकेला छोड़ कर, फिर क्यू आज मुझे वार वार सताने लगी है।न चाह कर भी याद करू मै उस रूह को जिसे याद करके रूह तक कप कपाने लगी है।चली थी जिस राह पर वो मैं उस राह तक को स्वप्न कि कहानी मान कर भुलाने लगा हु,फिर क्यू अचानक सा वो मंजर मेरे मन को बार बार मुझ से ही डराने लगी है।छोटी सी ठोकर हि तो लगी थी मुझे शायद मै संभल भी तो जाता, पता नहीं क्यू छोड़ कर वो मुझको जाने लगी थी।मैं सब कुछ छोड़ कर भी तेरे पास आना तो चाहा था, पर पता नहीं क्यों मेरी पाव बीच राह मे लड़ खराने लगे थे।जिस राह पर तु चली गयी थी उस राह पर मुझ को जाना तो मुमकिन नहीं था।अब मेरी आँखें तेरी राह देख देख कर थक जाने लगी है, तूझे गुमनामी मे खो जाने की  झुठी कहानी मन मे बनाने लगी है।फिर भी दिल को मना पाना मुश्किल ही होगा पर उसको भी मन समझाने लगी है।क्यू आज मेरी अधूरी कहानी फिर से याद आने लगी है।

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