Rajendra Prasad Gupta 16 Jun 2023 आलेख समाजिक आत्मविश्वास 31490 0 Hindi :: हिंदी
एक समय की बात है। एक गांव में एक बड़े ही बुद्धिमान शेर रहता था। वह शेर गांव के सभी जानवरों के लिए बड़ी सम्पदा था। लोग उसे श्रद्धा और सम्मान के साथ देखते थे। वह गांव के प्रमुख थे और उनकी बात किसी ने नहीं छेड़ी थी। एक दिन, शेर की गर्दन में अचानक एक बीच चढ़ गया। वह उछलकर खेलने लगा, इसलिए लोगों ने उसे ध्यान नहीं दिया। कुछ दिनों तक बीच उसी जगह में खेलता रहा और लोगों के लिए वह सामान्य बन गया। लोग अब उसे विभूति नहीं मानते थे। एक दिन, शेर एक सभा में पहुंचा और उसने एक बड़े आवाज में कहा, "मैं तुम्हें याद दिलाना चाहता हूं कि मैं एक शेर हूं, मेरी जगह वही है जहां मैंने कभी खड़ा होना है। मेरे पास विशेषता है, मेरी संपदा है और मेरी उपास्यता है।" शेर के ये शब्द सबको बहुत चौंका दिए। सभी लोग उसे फिर से उच्चतम सम्मान देने लगे। इससे शेर खुश हुआ, लेकिन उसे अपनी गलती समझ में आई। वह समझ गया कि उसने अपनी महत्वता को गाँव के लोगों के सामान्यता में खो दिया था। इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि हमें अपनी विशेषताओं और क्षमताओं को निखारने की जरूरत होती है। हमें खुद में आत्मविश्वास रखना चाहिए और अपने गुणों को दूसरों के सामर्थ्य के आधार पर नहीं मापना चाहिए। हमें खुद को जानने और स्वीकार करने की क्षमता रखनी चाहिए ताकि हम खुद को अपनी संपदा और उपास्यता के रूप में स्थापित कर सकें।
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