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दोस्ती
याद रहे यह हरदम सबको,दोस्ती का जमाना। बात-बात पर खुल कर आता,सबको खिल खिलाना।। बिना स्वार्थ का सुंदर रिश्ता, टिकी रही सब आसा। खाए मिलज�
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बाबा साहेब"अंबेडकर"
शोषित और सताए हुए का एक संघर्षी जन्मा था दवे और कुचलो के लिए शायद वो अजन्मा था उस युग में यूं इतना पढ़ना बस्की सबके बात नहीं भारत छोड़ो
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महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
नारी जैसा कोई नहीं, हर रूप में अपनी भूमिका निभाती हैं,कभी बेटी,बहु, मां बनकर घर संसार चलाती हैं, सबके चेहरे पर मुस्कान लाती हैं, कई रूप ह
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परोपकार
विषय-परोपकार दूजे अंतर मन की पीड़ा, क्यों कोई है जाने। अपने से बढ़ इस जीवन में, पीर नहीं वह माने।। साध रहे सब काज यहां पर,देख-देख कर मौ�
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होली पर लिखी कविता-होली में हो लें हम एक दूसरे के
होली के रंगों में मन के उमंगों में लोगों के संगों में झूम झूम जाएं हम घूम घूम गाएं हम होली में हो लें हम एक-दूसरे के ऋतु के वसंतों में �
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अवसर
अवसर हर व्यक्ति के, दरवाज़े एक दिन आता है। जो लाभ नहीं उठा सकता, वह मलते हाथ रह जाता है। मेहनत करने वाले, भाग्यवान् कहलाते हैं। कामचोर
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दिन
गुजर सकेंगे हर दिन सब बेकार के। मौसम आएगें ये जल्द बहार के।। भूल गए कष्टों को सपना जान के। खुश होंगें पल सारे रोज गुजार के।। जश्न मन�
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सोच
उजड़ गई बस्तियां बहुत सी है बनाने से पहले। थोड़ा सोच लेना दिल किसी का दुखाने से पहले।। करते हादसे घायल जिंदगी बसर तक यारों। कैसे जी सका
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लोग अपने मतलब के होते हैं
लोग अपने मतलब के होते हैं, अपने काम के लिए मीठे, काम निकलने के बाद कडुवा करेला बनते हैं।
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फागुन
रंग बसन्ती रंग में,चलती मस्त बयार। रोम-रोम पुलकित करे,जगा नेह मनुहार।। कलियां कोमल खिल उठी,फागुन भीगे रंग। रंग सृजन का भर रही,नव उमंग
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परिचय को मोहताज
परिचय को मोहताज फाल्गुन में आता हूँ धरा पे यौवन लाता हूँ तू मुझे नहीं जानता अपना नहीं मानता फूल बनकर आता हूँ कलियों में गूँथा जा�
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दिन
गुजर सकेंगे हर दिन सब बेकार के। मौसम आएगें ये जल्द बहार के।। भूल गए कष्टों को सपना जान के। खुश होंगें पल सारे रोज गुजार के।। जश्न मन�
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