अगर मुस्कुरा भर दूं, अगर गुनगुना भर दूं,
लोग सवालें चार पूछेंगे,
"बात क्या है"? ये दिन-रात पूछेंगे।
मैं अगर लिख देता हूँ,
बातें कई हस read more >>
मैं हारा, थका, बड़ा हुआ, लड़खड़ाते कदमों के बल खड़ा हुआ,
कई बार आईं अटकलें, खुद से मैं रूठा,
दुनिया हंसेगी मुझपर इस बात से मन टूटा।
ये गिरने के read more >>
*मौन एक कविता की तरह है*
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कुछ आँखों के माध्यम से बोलते हैं,
कुछ लोग मौखिक रूप से बोलते हैं,
कुछ लोग संकेतों से बोलते हैं,
कुछ लोग � read more >>
"अब हमारी बारी है"।
पढ़ा लिखाकर बड़ा कर दिया,
अब माँ-बाप की खत्म हुई ज़िम्मेदारी है।
हमारे कंधों पर अब उनकी ज़िम्मेदारी है।
कुछ बन कर द� read more >>
बुराई दो प्रकार की होती है
एक सामने की जाती है एक पीठ पीछे की जाती है
सामने और सिर्फ आपके सामने की गई आपकी बुराई माली का काम करती है जो अ� read more >>