Rupesh Singh Lostom 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक मैं सरकार हूँ 35084 0 Hindi :: हिंदी
मैं चित्रकार हूँ कलाकार हूँ पत्थर तरास ता हूँ और मूर्त बनाता हूँ चटान को काट के राह बनाता हूँ मैं एक तस्कार हूँ मैं सपना बुनता हूँ कल्पना करता हूँ मैं अद्रिश को दृश्य करता हूँ दुनियाँ को तस्वीर मैं भूगोल के तक़दीर बदलता हूँ फिजिक्स और कैमेस्ट्री बायोलॉजी मैथेमैक्टिक इन सब के मतलब बदलता मैं इतिहास मैं हिंदुस्तान हूँ मैं एक पन्नो में गुम झांसी के बलिदान हूँ भारत और माँ भारती के लाल आज के युवा और उबलता समाज़ हूँ मैं आज़ाद के ज़िद्द और भगत के सवराज हूँ मैं उसी बॉस के हिंदुस्तान मैं आर्यबरत इंदरपरस्त और हस्तिनापुर नेताओ के हाथ के कठपुतली बेवस जनता के दर्द और दबी दबी आबाज़ हूँ मैं ही रोता बिलखता आम इंसान मैं आज़ाद भारत के गुलाम हूँ नारी को लज्जित और बेआबरू करने बाला रावण और दुःशासन हूँ मैं इंसान हूँ मैं भगवान बनता हूँ मैं बदलता आदमी और मशीन राजनीतज्ञों के राजनीती के परिणाम क्रपशन और भ्रष्टाचार नेताओ के कठपुतली और नपुंसक कानून मैं सरकार हूँ मैं बुढा भारत बेबस लाचार खुशियों के लिए तरसता अपनों से बिछड़ता मै बिखरता समाज सिमटता इनसान हूँ