ना जाने कौन सी
हिमाकत की थी वक्त के साथ हमने,
जिससे ऐसी नजाकत पेश की वक्त ने।
आज वक्त,
बेवक्त में ही काल बनकर आ रहा,
इस धरा पर काले बादल स� read more >>
हाये गरीबों को तो यह महंगाई मार गई, पैसों की कमी मार गई,
वह भी जमाना था 10 का रिचार्ज होता था,
अब सीधी 200 की फ्लेक्सी हो गई,
रिचार्ज वाली कंप� read more >>