शारंगरी, नंम्बर 2
जूलम करते हैं! अपने ही रैहेम तो गेर करते है। और अगर जो अपने तो दिखावटी हमदरद होते हैं! और गेर तो हकिकत के हमदरद होते है! read more >>
जो मिला नहीं उसका ग़म कैसा
मिले बिना कर्म के वो फल कैसा
बड़ा लम्बा सफर है दोस्त “ज़िंदगी”,
चलते जाओ चलते जाओ.....
थकान न हुई तो सफर कैसा
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किसी के दिल का राज बन गए।
किसी का कल तो किसी का आज बन गए ।
किसी का बक्त तो किसी का राज बन गए ।
किसी की ख्वाइश तो किसी की आश बन गए ।
किसी का � read more >>
इस दिल में अरमान बहुत थे ,जबानी में हमारे भी नाम बहुत थे ।
जब टूटे तो विखर गये ,कुछ सुधरे तो कुछ विगड़ गए ।
कुछ निखरे तो कुछ राज बन गए ,कुछ ब� read more >>