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बचपन के दिन अब वो याद आते है वो गलियां वो चौबारे अब हमे बुलाते है। मिट्टी के वो गुड्डा और गुड़िया जाने क्यों हम बनाते थे घर घर से मिट्ट� read more >>
ये जिम्मेदारियां ही तो है जो इंसान को वक्त के साथ चलना सीखा देती है हालात कैसा भी हो लड़खड़ाने के बाद सभलना सीखा देती है कोई गिरता हैं � read more >>
* जिसके होने से में ख़ुद को मुक्कमल मानती हूं में खुदा से पहले अपनी मां को जानती हूं। * मुझे माफ़ कर मेरे यां खुदा झुक कर करू ते read more >>
वचन की आड़ कैकयी, मांगी वनवास रघुवर का। महाबलि बालि को मारा, राम ले परदा तरुवर का। इच्छा मृत्यु भी मृत्यु मांगे, परदा शिखंडी तुवर का। स read more >>
बहुत कुछ सिखाया आपने हमे आते जाते। बार बार लो बिदाई तुम भी अब जाते जाते। अपनों का तुमने रंग दिखा के बताया। सबको एक जैसा सत्य पर है चल� read more >>
उबड़ खाबड़ पथरीली राहों पर, जो खूब चले और अटल रहे! उन अटल बिहारी को प्रणाम! उन अटल बिहारी को प्रणाम! राष्ट्रभक्ति और समर्पण को उद्देश्� read more >>
#माननीयश्रीअटलबिहारीवाजपेई माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेई जी के सुशासन दिवस पर उनके चरण कमलों में समर्पित मेरी यह रचना कविता = ( भीड़ ) read more >>
कविता-जिम्मेदारियां जिम्मेदारियां एक बोझ है ढोने वाले पर लद जाते हैं, ना ढोने वाले को नासमझ/ नालायक/ आवारा लोग कह जाते हैं, जिम्मे� read more >>
लोग कहते है कि दुनिया मतलबी होती है लेकिन यह भूल जाते हैं कि हम भी इसी दुनिया का हिस्सा है। read more >>
वो हवा भी कितनी खूशनसीब हैं जो तुजे छूकर गुजरती है सूखे ना वो फूल कभी जो तेरे सजदे में मेहकते है और देखा था कल मैंने बारिश की बूंदोको म� read more >>
दलित के घर मे जन्म लिया समाज उसे अछूत कहता था जब घर से बाहर वो निकलता कितना अपमान उनका किया जाता जब वो पढ़ read more >>
कविता - पथ दूर भले हो पथ जीवन का त्याग हौसिला कभी न मन का चलना सीखो अपने पथ पर चलते चलना बढ़ हर पग पर आलस में ना समय गवांना बिना अर्थ ना read more >>
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