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मिलन धरती से अम्बर का कहीं मिलकर भी अधुरा रह गया दीपक जल के सबको रौशनी देते हुए भी खुद अंधेरे में रह गया। read more >>
जलती रेत की साहारा(मरूभूमि) में पानी की इक बुंद अमृत बनगई बरस के मन में वसंत का इन्तजार या तो कोई कविता या काहानी बन गई। read more >>
रिश्ता इन्सान की जरुरत है दिल पे इसकी हूकुमत है तेरे प्यार की वज़ह से जींदा हैं हम नहीं तो खुदा को कबसे हमारी जरुरत है। read more >>
जिंदगी की राहों में जब आगे जाओगे पिछे एक एक साया हरदम पाओगे मूड कर देखने से तन्हाई होगी मगर दिल से एकबार मेहसूस करके देखो हर कदम हमें � read more >>
वीते हुए पल कभी वापस नहीं आ सकते सुखे हुए फूल फिर से खिल नहीं सकते कभी कभी ऐसा लगता है कि आप हमें भूल गए हो लेकिन दिल की किसी कोने से एक आ read more >>
हम से नाराज़ होना तुम्हारी गलती कहलाएगी अगर तुम जो रुठ गए तो इए सांसे थम जाएंगी तुम युंही मुस्कुराते रहो जिंदगी भर इसी से हमारी जिंद� read more >>
मौजुदगी जरुरी नहीं जरुरी एहसास है हम कहीं दूर नहीं तेरे आसपास हैं। जरा देखो तो मन की आंखों से हमें हम हर कदम पर तुम्हारे साथ हैं। read more >>
माना की हम हालत से मजबूर रहते हैं फिर भी तेरे ख्यालों में चुर रहते हैं आंखों में रहती है तसबीर तुम्हारी क्या हुआ जो हम तुम से दूर रहते � read more >>
गुरु शब्द बड़ा ही सूखकारी, उनके रहते न आती है, किसी भी प्रकार की समस्या भारी। हम सब रहते हैं बेफिक्र, की अपने ऊपर हैं गुरुवर। गुरुवर_गु read more >>
लगता है निराश हो गया है, कुछ तो वजह होगी? खैर छोड़ो कोई बात नहीं। लगता है कुछ ज्यादा ही, मगरुर हो, नहीं तो, तुम्हें भी पत्ता होता, अब क्या read more >>
ये प्रेम की मजधारा तू बेहती चल सुखों में सुख देती चल मैं जीने की हर बातों को गुलाम करता हूं बस तू आनंद पिरौती चल क्या जीना दुखों में स� read more >>
इतनी सी गुज़ारिश है किसी बेज़ुबान को मत सताओ सुबह शाम बस इक रोटी इन लावारिस कुत्तों को खिलाओ - त्रिशिका श्रीवास्तव ‘धरा’ read more >>
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