आज ये मौषम इतना नम क्यों है।
कहि आज फिर उसकी आँखे तो नही रोइ है।
और खुले आशमा में ये काली घटा छाई है।
लगता है आज उसे फिर मेरी याद में नीं� read more >>
तुम्हारी,
सांसों की,
सरगम ,
और मेरी
धड़कन की,
युगलबंदी से,
बनता है....
हमारे ,
जीवन में,
मधुर संगीत....
उदय सिंह कुशवाहा
ग्वालियर मध्य प्� read more >>
इश्क की गलियों से होता हुआ
कितनी रसाकसी के बाद आज
पहुंचा हूं मुकाम पे....!
बहुत कुछ मिलने की उम्मीद में
सब कुछ गवा वैठा हूं...!
राह बदर रा� read more >>
अक्सर मैं दु:खी हो जाती हूँ ,
जब किसी दूसरी औरत को,
देखकर तुम्हारी आंखें विस्तृत,
हो जाया करतीं हैं तब....!
या फिर मेरी पीठ पर गढ़तीं हैं ,
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