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आज ये मौषम इतना नम क्यों है। कहि आज फिर उसकी आँखे तो नही रोइ है। और खुले आशमा में ये काली घटा छाई है। लगता है आज उसे फिर मेरी याद में नीं� read more >>
मिट गये बो लोग जो मुहोब्बत को हीर और खुद को राँझा समझते थे। सलामत रहा हमारा बजूद क्योकि हम, खुद को आवारा समझते थे। #babajidikoli read more >>
बरसता पानी, गरजते बादल, चमकती बिजली , मदहोश हवाऐं , हवाओं में बहता संगीत.... बूंदों में रबानी उन पलों में.. तुम्हारे हमारे धड़कते दिल... द read more >>
बरसता पानी, गरजते बादल, चमकती बिजली , मदहोश हवाऐं , हवाओं में बहता संगीत.... बूंदों में रबानी उन पलों में.. तुम्हारे हमारे धड़कते दिल... द read more >>
तुम्हारी, सांसों की, सरगम , और मेरी धड़कन की, युगलबंदी से, बनता है.... हमारे , जीवन में, मधुर संगीत.... उदय सिंह कुशवाहा ग्वालियर मध्य प्� read more >>
सुनो, जो तस्वीर बनाई है, अपने जहन में मेरी .... तुमने उसको सभांल कर रखना.... उसमें पल- पल बदलती सूरत दिखती है, मेरी..... उदय सिंह कुशवाहा read more >>
नींद बेच झुकानी खरीदी ये कैसी महंगाई हैं तुझसे इश्क़ कर रोज हैं मरते ऐ कैसी जिंदगानी हैं पगडण्डी सी तू आडी टेढ़ी फिर भी तू इतराती है� read more >>
इश्क की गलियों से होता हुआ कितनी रसाकसी के बाद आज पहुंचा हूं मुकाम पे....! बहुत कुछ मिलने की उम्मीद में सब कुछ गवा वैठा हूं...! राह बदर रा� read more >>
सबाल कई हैं जो उलझता हैं सपने में भी रुलाता हैं हाँ रुलाता हैं सपने में भी पर सच बताऊ तो सबाल और हैं जो सुलझाने हैं खुद को जवाब बताने read more >>
सबाल कई हैं जो उलझता हैं सपने में भी रुलाता हैं हाँ रुलाता हैं सपने में भी पर सच बताऊ तो सबाल और हैं जो सुलझाने हैं खुद को जवाब बताने read more >>
अक्सर मैं दु:खी हो जाती हूँ , जब किसी दूसरी औरत को, देखकर तुम्हारी आंखें विस्तृत, हो जाया करतीं हैं तब....! या फिर मेरी पीठ पर गढ़तीं हैं , read more >>
तुम आना मेघ उमड़-घुमड़़ तुम आना मेघ, सहज-सरल तुम छाना मेघ। प्रीत का अमृत, तुम बरसाना मेघ, प्यास धरा की तुम बुझाना मेघ। उमड़ -घुमड़ तुम � read more >>
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