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करो प्रेम सब देश से-आपस में हो प्यार
कुंडलिया दिवस मेरे मन की पीर को,समझो मेरे यार। करो प्रेम सब देश से,आपस में हो प्यार।। आपस में हो प्यार,वतन पे हम हैं मरते। बनूं धार तलव
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धर्म बढ़े तब खूब- ज्ञान की बहती सरिता
कुंडलिया छंद कविता का संसार ने, सबको दिया मुकाम। ज्ञान भरी दी प्रेरणा,किया खुशी आवाम।। किया खुशी आवाम,हुनर देता है सबको। जन जन में उ�
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जब हो दृढ़ उत्साह-सपने हों साकार तब
कुंडलिया छंद सपने हों साकार तब, जब हो दृढ़ उत्साह। जोर शोर से मन लगा, करूं फतह हर राह।। करूं फतह हर राह,खुशी में बीते जीवन। पूरा कर कर्�
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भारत भूमि अखंड हो-अटल सुरक्षित देश
कुंडलिया छंद भारत भूमि अखंड हो, अटल सुरक्षित देश। युग युग तक हस्ते चले,रहे सदा अखिलेश।। रहे सदा अखिलेश,प्रगति की बहार आए। खुशियां सब�
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जीवन सुरभित खूब हो-दिल में हो अति प्यार
कुंडलिया छंद नूतन साल खुशियां भरे,लाए मधुर बहार। जीवन सुरभित खूब हो, दिल में हो अति प्यार।। दिल में हो अति प्यार,चाह पूरी हो सबकी। सब
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अमर रहेगा नाम तब-सीरत में हो प्यार
कुंडलिया छंद चोखा एक मिसाल बन, बने देश गुलजार। अमर रहेगा नाम तब, सीरत में हो प्यार।। सीरत में हो प्यार,नेह का होगा दुनिया। शर्म करे तब
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सब कुदरत के खेल हैं-सहे मनुज लाचार
कुंडलिया छंद होनी होकर ही रहे, रखिए सबसे प्यार। सब कुदरत के खेल हैं,सहे मनुज लाचार।। सहे मनुज लाचार,और श्रम कर तब बढते। मिटे तभी सब प्�
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शेखी रहे बघार जो-सुनिए यह मधु ज्ञान
कुंडलिया छंद शेखी रहे बघार जो,सुनिए यह मधु ज्ञान। औरों पर भी ध्यान दें,रखे खुदा तब मान।। रखे खुदा तब मान,आस सब पूरे करते। खुशियाँ मन म
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व्यर्थ नहीं जाता कभी-अच्छी सोच विचार
कुंडलिया छंद केवल खुशियां ही मिले, जीवन हो गुलजार। व्यर्थ नहीं जाता कभी,अच्छी सोच विचार।। अच्छी सोच विचार,वरदान लगता हमको। मन में रह
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मेरी जिंदगी में उदासी रहती है- चांद को चांदनी की आस रहती है
कविता *उदास जिंदगी* मेरी जिंदगी में उदासी रहती है चांद को चांदनी की आस रहती है।। कोई भी नशा नहीं किया मैंने फिर भी नशे की खुमार�
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धरा वसन्ती हो गई-घर घर में है हर्ष
कुंडलिया छंद पूजा मय आँगन लगे,प्राण करे उत्कर्ष। धरा वसन्ती हो गई,घर घर में है हर्ष।। घर घर में है हर्ष,कृपा माँ धनदा करिए। सबको हो उल�
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ईश्वर के आधीन सब-उनसे ही संसार
कुंडलिया छंद माया छाया से भरी, करते रहें पुकार। ईश्वर के आधीन सब,उनसे ही संसार।। उनसे ही संसार,करे सबका वे पालन। अदभुत अनुपम कांड,भव्
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