तुम खुश हो,
या दुखी,
मुझे नहीं मालुम,
क्योंकि
कई जमाने से,
तुम से नहीं मिला...
परन्तु मैं,
मैं हमेशा,
तुम खुश होगी,
यही मिथ्या
सोच कर,
रो� read more >>
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ना कुछ देना था अपने हाथों में।
ना कुछ लेना था अपने हाथों में।
वो सब उस खुदा के हाथ है।
वो कब लेता है कब देता है।
ये सब उस खुदा read more >>
(मुक्तक छंद)
घर के रहे न घाट के, थोड़ा अब तो सोच।
चलें सँभल कर अब जरा,रहे नहीं संकोच।
मैया नैया पार कर,जीवन कर गुलजार_
बढ़े बुद्धि में तेज read more >>
(दोहा छंद)
हार जीत के दाव में, फसा जगत के लोग।
मन से अथक प्रयास कर,पाते सुख का भोग।
जीत सुनिश्चित कर चलें,रखें सत्य का ज्ञान_
खुशियों से � read more >>
(मुक्तक छंद)
हलचल करें मत यूं कि नव, तकरार हो जाए।
जीना हमें है शान से, ना रार हो जाए।
हसते रहें भाई यहां, जीना यही सुन्दर_
सबको निजी बात� read more >>