समय गुजरता ही गया हम कहां से कहां आ गए!
न जाने कब बचपन बीता, जवानी गुजरी ,इन हाथों से उम्र के कई वर्ष गुजरे!
पता ही न चला, हम कहां से कहां आ � read more >>
(दोहा छंद)
आया समय चुनाव का,उत्सव जैसा आज।
मुश्किल अब तो दौड़ है,घृणा युक्त है नाज।।
आया समय चुनाव का, गली गली में शोर।
सबके दामन एक सा, � read more >>
(दोहा छंद)
सभी बदलाव में लगे, आ जाए अब होश।
आया समय चुनाव का, लोगों में भी जोश।।
आया समय चुनाव का,उत्सव जैसा आज।
मुश्किल अब तो दौड़ है,घृ� read more >>
कभी कभी जीवन में ऐसा पल भी आता है कि मुझे यह लगता है कि मेरे लिए सभी रास्ते बंद हो चुके हैं और अब मैं कुछ भी जीवन में नहीं कर पाऊंगी मैं नि� read more >>
(दोहा छंद)
आया समय चुनाव का, पार्टी सब में होड़।
अपने अपने ढंग से, बनते सब बेजोड़।।
आया समय चुनाव का, करते सभी प्रचार।
खूब सभाएं हो रहे, अ� read more >>
सजा के मंडी -
गद्दी पे बैठकर ;
ढोंग रचा रहा पाखंडी ,
ले के सब सब से वोट -
आघात किया दे के -
सब को चोट ;
तू भूल गया -
अपना परिचय ,
जो भी है तू -
है � read more >>