चली रे चली दीवानी...
चली संगम को ये दरिया दीवानी,
अल्हड़ सी है इसकी ये रवानी,
ना देख डगर, न देखे किनारा,
बस एक धुन में है ये बेगानी.
चली रे � read more >>
My Father – एक खामोश रहनुमा
हर इंसान की ज़िन्दगी में कुछ रिश्ते बग़ैर दावे, बग़ैर शोर के अपनी मौजूदगी साबित करते हैं। मेरे लिए वो शख्स मेरा � read more >>
Wish for Advik :
खुशियांँ ही-
खुशियांँ हों जीवन में तुम्हारे,
पूरी हों-
हर ख्वाहिश, हर सपना प्यारे,
हंँसते रहो-
तुम जब तक चांँद-सूरज रहें,
अद्� read more >>