किसी को पता ही नहीं जाना कहां है और कहां जा रहे हैं... "धरमा"
इतनी भीड़ है शहर में खो जाने का डर लगा रहता है
इसलिए तो मैंने जंजीर बांध ली खु read more >>
शुक्र है !मैंने तुम पर ऐतबार न की!
समय रहते ही खुद को! संभाल लिया !
जिंदगी तबाह न की !
जिस दिन से तुमको चाहा किसी
और की चाह न की?
न जाने !
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ऐ बसंती पवन तू क्यू बार बार उसकी खुस्बू की बहार लेकर आती है , क्या तुझे पता नहीं है कि अब मै उस खुसबू को भूलने की कोशिश कर रहा हूं , तू क्यू read more >>