(मुक्तक छंद)
कलकल चंचल जल दिखे, बांध हुआ है भग्न।
बरसे सावन झूम के,सभी नदी जलमग्न।
मस्त सरकार सो रहे,आनन फानन काम_
सड़कों का भी लय बुरा,ज� read more >>
तुम न गम दो मुझे और भी बहुत से गम है मुझे मुझसे दूर न जाओ कभी पास तो बैठो कुछ अपनी कहो कुछ मेरी भी सुनो क्यों फिक्र करें जमाने की क्या कभी � read more >>