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शीर्षक (महामारी कोरोनावायरस) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) एक आपदा ऐसी आयी सारी दुनियाँ चीख़ी चिल्लाई। चारों तरफ़ थी चीख़ पुकार लोगों read more >>
ख्वाइशों से बढकर जो मिले उसका कोई किनारा नही होता। चाहे सपना कुछ भी हो जो हकीकत मे हमें ना मिले वो हमारा नही होता। *** *** *** *** *** कभी वा� read more >>
मैं जिन्दगी के कुछ मसले हल करना चाहता हूँ। मैं जिन्दगी के बीते हुये पल फिर से जीना चाहता हूँ। फासले कितने भी हो मैं उन्हे दूर करना च� read more >>
अंदर का सबेरा ,जब जाग जाता है बाहर का दिन भी, तब रात नजर आता है कहीं कुछ भी नही है, इस भीड़ भरी दुनिया में हम जागें, तो सब अपने ही अंदर नजर आ read more >>
मन चाहे चिड़िया हो जाऊं दूर दूर नदियों में जाऊं शीतल अमृत में चोंच डुबोऊ स्वर्ण रेत पर ठुमक ठुमक इतराऊ मन चाहे चिड़िया हो जाऊं। दूर � read more >>
मत छूओ छाया को अब बिखर जाने दो/ इन काले बादलो को आसमान में उड़ जाने दो, मत छूओ छाया को अब बिखर जाने दो/ तिन - तिन बिखरती इन गर्मियों को आ� read more >>
प्रकृति किलेबंदी नदी नहरो से वो सिंह द्वार है मैं यहीं का हूं नहीं शिखरो से है अभिनंदन करने दो शेर खड़े कोयल गाती स्वागत गीत और नृत� read more >>
जो पहले ही कदमो में लडखडा जाये वो चाल ही क्या ? जो तेज भी दौडे और मंजिल तक न पहुँचे वो रफ्तार ही क्या ? जो चहरा देखकर मुँह फेर ले वो प्यार read more >>
शीर्षक (माँ की ममता) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) इस धरती पर जब मै आया गोद म read more >>
चालकी दिखा - दिखा करके आपने कितना कुछ हासिल कर लिया है। प्राप्त कर लिया है या इक्कट्ठा कर लिया है। मैं देखना चाहता हूँ।जवाब क्या होता ह� read more >>
Maa
Ek anokha ahsas hai vo | Pani piker bhi na jaye jo || Vhi pyas h vo ; Are vo meri maa hai saheb | Aese hi nhi itni khas hai vo || read more >>
कल तक था पाषाण युग आज आया है टेक्नोलॉजी युग। कल तक था तिमिर युग आज आया है बल्ब युग। देख रहे हम बदलता युग।। सुनो जरा कल का युग कहते थे � read more >>
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