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बदलता युग

Krishan kumar 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य 78694 1 5 Hindi :: हिंदी

कल तक था पाषाण युग
आज आया है टेक्नोलॉजी  युग।
कल तक था तिमिर युग
आज आया है बल्ब युग।
देख रहे हम बदलता युग।।

सुनो जरा कल का युग 
कहते थे जिसको पौराणिक युग।
लकरी के थे घर बने
जंगल थे सब करे परे।
एक दूसरे से रखते थे तुक
देख रहे हम बदलता युग।।


सुनो जरा आज का युग 
कहते है जिसको टेक्नोलॉजी युग।
धातुओ के है घर बने
जंगल हैं सब कटे पड़े।
न रखते एक दूसरे से तुक
देख रहे हम बदलता युग।।


हर काम को है आसान बनाया 
पर विनाश को है पास बुलाया।
भले इतना टेक्नोलॉजी रहता इतना हमारे पास
पर पर इतने कटे ना होते कास।
रखते हम पर्यावरण से तुक देख रहे हम बदलता युग

Comments & Reviews

Krishan kumar
Krishan kumar Best poem I have ever read

3 months ago

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