बादल छाए घने, बरस रही है बूंदें,
गरजती है बिजली, चमक रही है बिजली ।
मन में आई है आनंद की भरमार,
सावन की रातों में, खुशियों की बहार।
पानी क� read more >>
न जाने क्यों बारिश के मौसम की तरह तुम्हारी यादें भी जब तक बरस जाती है मुझ पर यूं न तड़पाया करो यादों में आकर कभी मेरी गली भी आया करो यूं ह read more >>
(दोहा छंद)
आया समय चुनाव का,उत्सव जैसा आज।
मुश्किल अब तो दौड़ है,घृणा युक्त है नाज।।
आया समय चुनाव का, गली गली में शोर।
सबके दामन एक सा, � read more >>