" संतोषजनक जीवन ... "
जेठ दुपहरी की चिलचिलाती धूप मे ...
मैंने घर आकर जैसे ही फ्रिज खोला , इसमें से उठती भभक ने मेरे दिमाग को भभका दिया ...
"इसे read more >>
(Verse 1)
तेरी दोस्ती में खुद को मिला हूँ,
मुस्कानों के फूल खिला हूँ।
जीवन के सफर में बनी है ये राह,
सबको यहाँ प्यार से गले लगाता हूँ।
(Chorus)
दो read more >>
बन गए हम मित्र, तन मन के साथ,
चलते रहेंगे साथ आसमान के ऊपर।
आपसी सबसे जुड़े, दिल से दिल का रिश्ता,
हम एक-दूसरे को समझें, हो सदैव खुशहाल।
द read more >>