AJAY ANAND 08 Apr 2023 शायरी प्यार-महोब्बत शायद, निष्ठुर, मजबूर, ्कवक्त 36420 0 Hindi :: हिंदी
वक्त के हाथों मजबूर हो जाता हूं, मैं शायद।😁 *शायद, इसी वजह से निष्ठुर हो जाता हूं, मैं शायद।।🤔 अजय आनंद
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