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सुबह का अरण हूँ मैं

Pradeep Kumar Maurya 30 Mar 2023 शायरी समाजिक 51933 0 Hindi :: हिंदी

सुबह का अरण हूँ मैं ,
भूखे का भरण हूँ मैं,
दुश्मन को भी माफ करने वाला,
आज का करण हूँ
मैं,






शायरी- प्रदीप 

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