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खावाईश-दर-दर भटक रहे है खावाईशो कि आंघीयाँ ले उडी़

Raj Ashok 15 Nov 2023 शायरी समाजिक खवाईश 40448 1 5 Hindi :: हिंदी

ये, खावाईशो कि आंघीयाँ ले उडी़
बादशाहों की नींद, 
और परिन्दों के घर........
दर-दर भटक रहै है। आज भी 
मुहोबतों के  वाशिन्दे ,
के, ऊमीद, मे उजड़ गऐ लोखों शहर.....

Comments & Reviews

मोती लाल साहु
मोती लाल साहु गजब भाई गजब कहा... बिल्कुल सत्य,, 👍👍👍

2 years ago

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