Raj Ashok 30 Mar 2023 शायरी दुःखद 40289 0 Hindi :: हिंदी
जख्मो कि एक शाम,
सुबह से ही हो रहे थे, बदनाम ।
देखा
थी सब की नजर मे नफ़रत
गुनाह,
क्या हुआ, कुछ मालूम नहीं ।
बस ,
हर कोई ,हवा सा बह रहा था।
इसने
अच्छा नहीं किया ,कह रहा था।