Pravin Chaubey 28 Feb 2025 शायरी अन्य #कविता#शायरी#पोयम#पोयट्री #shayari# 25729 0 Hindi :: हिंदी
गरीबी का दामन संभाले खड़े हैं,
सपने तो ऊँचे हैं, पर टूटे पड़े हैं।
रौशनी जिस शहर में बिकने लगी है,
वहीं कुछ चूल्हे अब तक बुझने पड़े हैं।
✍️ प्रवीण चौबे
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