Pandit Rahul tiwari bhadohi 06 Apr 2025 शायरी दुःखद 16721 0 Hindi :: हिंदी
एक दिल ही था तेरे सहर में मेरा अपना कोई न था तू भी दोस्त छोड़ चला तेरे सिवा कोई अपना न था कहता हु एक बार आ जा अपना दिल बहला जा दोस्त फिर एक ऐसी शाम आये बहलाने के सिवा अपना जा मुझे