जिसे आप घमंड कहते हो ,
जनाब उसे हम गुरूर की संज्ञा देते है ।
प्रेम से समझ लीजिए जनाब ,
नहीतो हम थप्पड़ से समझा देते है।
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Baba ji dikoli जी गुरु जी किन्तु यदि लोग प्रेम से समझते होते तो हमारे शांत योगी जी आज शांत रहकर प्रेम से ही समझा रहे होते तो मान्यवर युग के साथ विचारधाराय बदलती है।