Shakuntala Sharma 30 Mar 2023 शायरी प्यार-महोब्बत # कब तक इंतजार करु में# मौसम बदलते ही# कयामत तक सफर# प्रेम की ऋतु 65915 0 Hindi :: हिंदी
कब तक युं तेरा इंतज़ार करू में ?. उम्र का आखरी मुकाम है सांसो के टुटने का भरोसा नहीं हॉं अगर वायदा कर ले मुझसे जनम -जनम में फिर मिलने का । तो कयामत का सफर भी तय करू में ॥
खुदा के दर पर हाथ फैलाए दुआओ में असर का कब तक युं कारोबार करू में ? मेरे जख्मो के नासूर बनने का भरोसा नही" ।
हॉ अगर . तू मरहम बन जाये दर्द की ' तो दर्द को नजर अंदाज करू में।। '
मौसम के बदलते ही सब कुछ बदल जाता है। कब तक यु ऋतु के आने का इंतजार करू मैं " I प्रेम की ऋतु आने का भरोसा नही ॥
हाँ अगर तू बंसत बनकर मेरे तन पर छा छाये " तो प्यार भरे मौसम में फिर रंग भरु मैं। I l
मिलना और बिछुड़ना तो खेल है तकदीरो का ।
कब तक यूं तकदीर बदलने का इंतजार करू में।?
किस्मत की लिखावट मिटने का भरोसा नही।।
हां अगर तू हर जनम में साथ चले तो फिर खुदा से बगावत करू मैं।।
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शकुन्तला शर्मा ॥
I am a teacher and a housewife. My Education M.A.My hobby is reading, teaching, writing etc. I am al...