रजनीश राज 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक किसी को अपमानित नहीं करे| 48415 0 Hindi :: हिंदी
लोगों ने जैसा चाहा वैसा बन गये हम,किसी ने धोका दिया,किसी ने दिल तोङा, और लोग कहते हैं कितना बदल गये हम..
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