Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

पलाश

Kishor Kumar Bhardwaj 06 Mar 2025 कविताएँ अन्य 24152 0 Hindi :: हिंदी

हरियाली संग संवत्सर बिते फागुन मास संन्यास के
पतझड़ के बाद जंगल दहक रहा जब खिले फूल पलाश के
जब वन-उपवन सुखें हो जल की हो सबमे अमिट प्यास 
जब तप्त शिलायें हुई लाल धरती से निकलती हो आग
ये कौन तपस्वी है वन में? केसरिया रंग प्रभात लिए
केसरिया पुष्प शिखर पर उसके कर रहे प्रकृति का श्रृंगार
प्रकृति के ये धर्म ध्वजा तपसी कोई ज्यो साधक हो
इनकी छाया में बिछी हुई केसरिया पुष्पों की चादर हो
गिरकर भी नहीं क्लेश कोई ये पुष्प बड़े ही त्यागी है 
प्रियतम से विच्छेदित है पर दर्शन के अभिलाषी है
सम्बल से विच्छेद अधर से छूटे हुए बिलगाए से 
केसरिया वैराग्य का चोला लिए प्राण विमोह हो रूठे हुए 
तुम पतझड़ या बसंत से बेपरवाह मुस्करा कर मृत्यु को 
जीते हुए नहीं किसी से आस मन से हो तुम पुष्प पलाश के...

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: