Uday singh kushwah 30 Mar 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत 44600 2 5 Hindi :: हिंदी
" "वो सिन्दूरी शाम"
ओंस की वो वूंदें तुम्हारी ही तरह
लगतीं हैं भींगी-भींगी-सी ...
हरश्रृंगार की यह खुशबू भर देती है
तुम्हारे आंचल मेंं भरे,प्रेम की तरह मन।
सिन्दूरी डंडियों पर सजते हैं, सफेद फूल
घर-आंगन मेंं तुम्हारे ही लिए ही
स्वागतार्थ विछे हैं,फूल राहों मेंं
आज तो आंसमा भी झुका-झुका सा
लगता है सजदे मेंं तुम्हारे...।
यह ठंडे दिन भी चाहतें हैं
तुम्हारी सांसों की वह गर्मी
जो तुमने संभाल कर रखी है
बडे़ अरसे से मेरे लिए।
वो सांझ भी अब वुढि़या गई है
झप्प अंधेरे से मेंं,
अब उसके भी बाल निरे
सफेद हो आयें हैं।
तुम्हारे विना यह खामोश
शामें लगतीं हैं युगों-लम्बी
मैं देखता रहता हूँ,तुम्हारी वही
तस्वीर जिसमें तुम्हारे बालों ने
लपेट रखा है उस समय को
जो तुमने इन्हीं दिनों
विताया और कितना छोटा कर गई
लम्बी-लम्बी रातों को...।
चंद मिनटों की ठहरी-ठहरी रात
सुबह कहाँ चली जाती है
हमें खबर ही नहीं होती
फिर औंघते से दिन कितने
लम्बे और वोझिल हो आते
तुम्हें याद है न...।
यू.एस.बरी✍️
लश्कर,ग्वालियर,म.प्र.
3 years ago
3 years ago