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वो चांद

Uday singh kushwah 30 Mar 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत Google/yahoo/bing 56816 0 Hindi :: हिंदी

मेरा चाँद... (शीर्षक)
उस मुडेर पर ,पता नहीं 
क्यों रुका है, मेरा चाँद,
क्या उसको घर का पता नही,
क्या अपनों के दिल दुखाने की
खता तो नहीं?
कभी वादलों की ओट लेकर 
झांकता है,तांकता है
फिर मधुर वयार मेंं कुछ
गुनगुनाता- सा दीखता है।
रोज अलग -अलग मुडेरों
से क्यों दिखता है
क्या उसे सुध नहीं ,कि इंतजार
करता होगा कोई अपना-सा
हर रोज की तरह ।
फिर देखते-देखते आंखो मेंं
मिलने के सपने लिए सो जाता होगा ।
फिर झांकता है उस प्रीत भरी
नजरों से ,मुझे देखकर खुश होता है
विखेरता है चाँदनी मेरे आंगन मेंं
हर रोज ,सुबह होते ही चला जाता
है चाँदनी के आगोस मेंं
फिर  कल आने के लिये कह कर।
आज फिर से मिलने का वादा था
कुछ कही-अनकही,सुनने-सुनाने 
का इरादा था ,पर दूर कहीं...
किसी और की मुडेर पर वह
सजता-संभरता किसी और का
इंतज़ार करता नजर आता है
अपनी चाँदनी का ।
मेरा चाँद...।
                   यू.एस.बरी,✍️
   लश्कर,ग्वालियर,मध्यप्रदेश






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