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"व्यस्त रहो अपने कर्म में"

Anilkumar Rathwa (Sameer) 28 Aug 2025 कविताएँ अन्य "व्यस्त रहो अपने कर्म में" 15880 0 Hindi :: हिंदी

जो इंसान अपने काम में व्यस्त है,
वही सचमुच अपने जीवन में मस्त है।
जो अपने सपनों को सच करने में लगा है,
वह हर पल को जीने का असली मज़ा ले रहा है।

पर जो दूसरों की तरक्की पर अश्रु बहाता है,
वह भीतर ही भीतर हर रोज़ घुल जाता है।
ईर्ष्या की आग में जो मन जलता है,
वह चैन और सुख से सदा वंचित रहता है।

जीवन का रहस्य है — कर्मरत रहना,
अपनी राह पर बिना डिगे चलना।
दूसरों से तुलना मत करना,
बस खुद से रोज़ बेहतर बनना।

जो अपना लक्ष्य साध लेता है,
वह जग में मिसाल बन जाता है।
और जो मन की शांति पा लेता है,
वह सच्चे अर्थों में जीवन जी जाता है।

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