Kishor Kumar Bhardwaj 23 Jan 2026 कविताएँ अन्य वसंत 5023 0 Hindi :: हिंदी
स्वर्णिम धूप, हरा मैदान पीली सरसों हुई जवान चुस्त हुआ, रंगों में नहा लो देखो वयस्क हुआ उद्यान झील में हैं कुछ श्वेत कमल या बादल नभ पर रहे टहल मृदु गान से कोयल के मोहित हैं नाच रहे मोरों के दल यूँ पवन की शरारत से उद्विग्न हैं कालियाँ फूलों का पा संरक्षण निश्चिंत हैं कालियाँ फूलों से चहुं ओर घिरे भौरे जैसे मद पान किए ख़याल तेरा भी भंग पिए आया बसंत को संग लिए.. #शुभ_वसंत_पंचमी