Kishor Kumar Bhardwaj 03 Mar 2025 कविताएँ प्यार-महोब्बत 18091 0 Hindi :: हिंदी
*"वक़्त की स्याही में लिपटी ज़िंदगी"* किसी ने आज हंसकर पूछा, "कौन है वो.?" हम भी मुस्कुराए, मगर जवाब यूँ दिया— "किसी के कानों की बाली में जड़ी मकड़ी की गुत्थी सुलझा लें फुर्सत नहीं हमें, Act ; Statute ; Rule ; Regulations की धाराओं से खेल रहे है हम, किसी के कंगन की खनक पर क्या ध्यान दें, फाइलों की धूल से दोस्ती कर रहे हैं हम।** अकादमिक और प्रशासन की गलियों में घूमते, अधोसंरचना की दीवारें खड़ी कर रहे हैं हम। सौंदर्य संसाधनों की महकती ख़ुशबू को क्या समझें, दफ़्तर की पुरानी रपटों में साँस ले रहे हैं हम।** अपने प्रेम के प्रस्ताव को अभी तक स्वीकृत करा नहीं पाए, मगर दफ्तर के लंबित प्रकरणों को निराकृत करा रहे हैं हम। मंगलसूत्र की कल्पना भी अब व्यर्थ लगे, जब टेग की गाँठ फाइलों में बाँध रहे हैं हम।** और देखिए, वक़्त का तक़ाज़ा कैसा है, अपनी ही गठबंधन की नवीन फ़ाइल नस्तीबद्ध करा रहे हैं हम..."** — एक मुसाफ़िर.. 😎