संदीप कुमार सिंह 21 Jun 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 37814 0 Hindi :: हिंदी
उत्साह में हम रहें और उत्साह हम में रहे, तब जीवन के हर जंग में जीतना तय है। संघर्षों की इस धरा पर नित संघर्ष है, बाधाओं का भी आना निशित ही है। अगर हम उत्साही होकर मुकाबला करें, तो बाधाओं का नाश भी होना निश्चित है। तमन्नाओं की महफ़िल में मैं पलता हूं, इसे पूरा करने के लिए अपार मेहनत करता हूं। चाहता हूं दुनिया की तमाम खुशियां हमें मिले, इस छनभंगुर जीवन को आनन्दों में डुबाए रखूं। प्यार की मरहम मुफ्त में ही बांटता रहूं, हरेक दिलों में गहरा असर कर समाता रहूं। गुलशन जैसे मेरे विचार से दुनिया सुरभित हो, बिछड़ों को फिर से प्यार से मिलाता रहूं। मध्यस्थता का हम युवराज हैं और मशहूर भी, बिखराव_टकराव यूं ही एक कर देते हैं। नीले गगन के नीचे इस प्यारी धरा पर मजा है, मस्ताना पवन का झोंका जवानी देता है। उत्साह रखने के लिए तो प्रकृति सजी हुई है, फिर व्यर्थ निराश होना तो अच्छी बात नहीं। उत्साह के रंग में नित रंगता ही रहूंगा, उत्साही रचना दिल की कलम से रचता ही रहूंगा। सदा ही सादगी का दामन थामे रहूं, ख्वाहिशों के दिए कतार से सजाता रहूं। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_सस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....